एक चतुर बंदर मोती

 एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में एक चतुर बंदर, मोती, रहता था। मोती बहुत ही चालाक और समझदार था। उसका एक दोस्त था, गोलू, एक बड़ा सा भालू।


एक दिन, गांव में एक बड़ा मेला लगा। मोती और गोलू ने सोचा कि वे भी मेले में जाएंगे और मज़े करेंगे। मेले में घूमते-घूमते, उन्होंने देखा कि एक ज्ञानी बाबा अपने जादू से लोगों को हैरान कर रहे हैं। मोती ने सोचा, "अगर हम बाबा से कुछ जादू सीखें, तो हम भी कुछ नया कर सकते हैं!"


दोनों ने बाबा से विनती की, "बाबा, हमें भी जादू सिखाइए!" बाबा ने उन्हें कुछ आसान जादू दिखाया, लेकिन कहा, "याद रहे, जादू का सही इस्तेमाल करना चाहिए।"


मोती और गोलू ने जादू सीख लिया और सोचा कि वे इसे अपने दोस्तों के साथ खेलने में इस्तेमाल करेंगे। लेकिन मोती ने सोचा कि क्यों न इस जादू का इस्तेमाल थोड़ा मज़ाक करने के लिए किया जाए।


उन्होंने गांव के बच्चों को भूत बनाकर डराने की कोशिश की। पहले तो सबको मज़ा आया, लेकिन फिर सभी को पता चल गया कि यह मोती का जादू है। सबने मिलकर मोती और गोलू से कहा, "जादू का मज़ाक मत उड़ाओ, इससे लोगों को दुख होता है।"


मोती ने समझा और माफी मांगी। उसने सीखा कि जादू का इस्तेमाल कभी-कभी मज़ाक में नहीं करना चाहिए। उस दिन के बाद, मोती और गोलू ने जादू का इस्तेमाल सिर्फ दोस्तों को खुश करने के लिए किया।


इस प्रकार, मोती ने समझा कि सही नीयत से किया गया काम ही सबसे अच्छा होता है। और गांव के लोगों ने फिर से मोती और गोलू से दोस्ती कर ली।


यह कहानी हमें सिखाती है कि मज़ाक करना मज़ेदार है, लेकिन दूसरों की भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए।

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